केरल की मीनागड़ी पंचायत देश की पहली कार्बन न्यूट्रल पंचायत बनने जा रही है। यहां के लोग जितना कार्बन उत्सर्जन कर रहे हैं, उसकी भरपाई इको फ्रेंडली एक्टीविटीज से कर रहे हैं। जैसे चार साल में यहां 10 लाख पेड़ लगाए गए हैं। इससे पंचायत में फॉरेस्ट कवर 50% हो गया।
पंचायत की अध्यक्ष बीना विजयन बताती हैं कि शुरू में हमारे पास कोई याेजना नहीं थी। लेकिन, समय के साथ हमने मॉडल विकसित कर लिया है। विशेषज्ञों की टीम 4 साल से पंचायत को कॉर्बन उत्सर्जन मुक्त बनाने का काम कर रही है। अब तो 85% काम पूरा कर लिया है।
हालांकि, अभी भी हम 17 हजार टन अधिक उत्सर्जन कर रहे हैं, जिसकी हमें भरपाई करनी है। जुलाई तक हम इसे कवर कर लेेंगे। लॉकडाउन का भी हमारे प्रयासों पर सकारात्मक असर हुआ है। गांव के अब्बास बताते हैं कि अब पंचायत के हर घर में फलदार पेड़ और किचन गॉर्डन हैं।
बड़ी हरियाली का ही नतीजा है कि यहां ऐसे पक्षी भी दिखने लगे हैं, जो दिखना बंद हो गए थे। स्कूल शिक्षक रहे ओवी पवित्रन कहते हैं कि यह इसलिए हो पाया, क्योंकि सभी ने अपने हिस्से का काम किया। यहां स्कूल की 4 चार एकड़ जमीन पर भी बांस लगाए गए थे। अब यह बेंबू पार्क बन गया है।
चार साल पहले जब पंचायत में लोगों ने मौसम को लेकर चिंता जताई थी, तब राज्य सरकार के सहयोग से यह काम शुरू हुआ था। इसके लिए विशेषज्ञों की एक टीम बनाई गई थी, जिसमें स्वामीनाथन फाउंडेशन, कन्नूर यूनिवर्सिटी और नीदरलैंड्स की डेल्प्ट यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ हैं।
पंचायत के मॉडल के 6 कदमः
- पेड़ों की गणना की गई, मिट्टी और पेड़ों में कार्बन स्तर को जांचा गया
- हर परिवार के फ्यूल खर्च और कचरा उत्पादन का डेटा जुटाया गया
- गणना की गई कि हर व्यक्ति औसत कितना कार्बन उत्सर्जन कर रहा है
- लोग अपनी जमीन पर पेड़ लगाएं, 85 लाख रु. की प्रोत्साहन स्कीम लाए
- घर के कचरे से खाद बनाई, इसका इस्तेमाल 3500 परिवार कर रहे हैं
- नई पीढ़ी को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें निशुल्क साइकिल दी जा रही है

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